बुधवार, फ़रवरी 26

बस प्यार के लिए

इक नज़र है तू दीदार के लिए
इक लम्हा है इंतज़ार के लिए
इक ख्वाब तू जिसे मेरी आखें देखे
इक है तस्वीर है तू बस प्यार के लिए.

बुधवार, जनवरी 20

प्यार की देहलीज़

प्यार की देहलीज़ पर जब पड़े कदम,
सब कुछ भूल गए हम,
तेरी आँखों में डूबे ख़ुशी में बदल गए गम,
मेरी तन्हाई तेरी शोखी से लिपटी यु,
अब तो दोस्तों की महफ़िल में भी तनहा हो गए हम,
"Ajay Rajput"

बुधवार, फ़रवरी 18

"Ajay राजपूत"
" dil के धड़कने का सबब याद आया,
वो तेरी याद थी अब याद आया"

सोमवार, जनवरी 12

अजनबी हमसफ़र


अजनबी रास्तों पर
पैदल चले
कुछ न कहे,

अपनी अपनी तंहाईया लीये,
सवालो के दायरो से नीकल कर
रीवाजो की सरहदों के परे
हम यूँही ही साथ चलते रहे
कुछ न कहे
चलो दूर तक

तुम अपने माजीं का जीकर न छेडो
मैं भूली हुई कोई नज्म न दोहराउँ
तुम कौन हो
मैं KYA हूँ
इन सब बातो को ,
बस रहने दे
चलो दूर तक
अजनबी रास्तो पर पैदल चले



गुरुवार, जनवरी 1

LOVE IS BLAIND


प्यार अँधा होता है!!!
सच ही तो है,जब चाहत की जमीं पर प्यार के फूल खिलते है तो उस वक्त न तो फूल के नाम की अहमियत होती है और न ही मिटटी की किस्म की उस वक्त तो बस फूल की खुशबू और उसका रूप अहम होता है, यही वजह है की इश्क की इबादत मे, प्यार की पूजा मे मजहब आड़े नहीं आता देश की सीमाए मायने नहीं रखती उम्र का फर्क नज़र नहीं आता........
''बस प्यार हो जाता है ''

बुधवार, दिसंबर 31

Find My Love With Me


अंबर जैसा निरलीपत्पन,
जलते दीपक सा जीवन ,
यही है मेरी परीभाषा,
वैभवशाली रूप तुमहारा
शालीनता की मूरत हो,
लीन हूँ जिसमे पल-पल मैं,

सोमवार, दिसंबर 29

बचपन

"कौन पतथर की रवीश इन्हे सीखा जाता है, Dil तो इंशा के होते है फूलो की है"
सच kitna mushkil sa hai kisi se अपने Dil का हाल बताना..waqt बीतने के साथ कुछ esh तरह Dil sakht हो जाता है ,जैसे daal से patta टूटने के बाद sakht हो जाता है हम बचपन से jawani की देहलीज़ पर कदम रख नहीं पाते की अपने बचपन का गला खुद ही अपने हाथो से घोट लेते है। बचपना jisme सब अपने होते है कोई पराया नहीं, सब का dard अपना लगता है, सब की परेशानी अपनी. हर चेहरा sachcha लगता है हर ख़ुशी अपनी सोचता hu keesi के साथ kya ऐसा गुजरता है कई वो अपने बचपन की मासूमियत, भोलापन, चंचलता सब कुछ बड़प्पन और sakht चेहरे के पीछे छुपा लेता है ? kisi se milte समय woh इतना डरा हुआ होता है की dil की छोटी सी छोटी बात भी बताने से डर सा जाता है. vishwash कंहा खो जाता है?

काश हम छोटे ही रहते ............................अजय राजपूत



गुरुवार, दिसंबर 25

NOT A GOD GIFT

"Dosti ko leker hamesha maine ek baat mehsus ki hai jishe es duniya ka koi bhi shaks mehsus ker sakta hai....main jab janma tab mere janam se pehle hi mere sabhi riste(reletion) nirdharit(fix) ho Chuke the. flana tumara bhai hoga, flana sister, ye mother hongi ye father, mama, chacha,dada, dadi sab koi pehle se nirdharit ho chuke the mere janam se bahut pehle yani humare sabhi riste GOD GIFT hote hai JINHE NIBHANE YA NA NIBHANE KI JIMMEDARI HAMARE UPER HAMARE JANAM SE PHELE HI RAKH DI JATI HAI, per jab hum bade hote hai samajhdar hone lagte hai duniyadari ki achchi-buri baato ko janne lagte hai tab hum apni Vivek Aur samajh se EK rista junte hai jishe nibhana -na nibhana hamari jimedari hoti hai ye rista khun ka nahi hota jabardasti hamare uper thopa nahi jata balki hum ese khud chunte hai apni soch se apne vivek se Uss Khubshurat aur khash riste ko kehte hai .DOSTI ......... 
Ajay Rajput
Date:25.12.08